वह अखरी पल!
- gouravsarangi007
- Apr 28, 2024
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दिन होता है, राते कटती हैं, दिल में हमेशा एक आरज़ू रहती है, शायद कभी एक ऐसा पल मिल जाए जिसमे में अपने खोए हुए वजूद को लौटा कर अपने पास ला सकूं।
आज ऐसा एक पल था, जी हां इसी दिन की तलाश थी बरसों बाद वो हिम्मत जुटा पाया हूं फिर से एक बार कोशिश करने की।
अपना मोबाइल उठाया और कॉन्टैक्ट्स में जा कर वह नंबर निकाला जिसपे करीब ढ़ाई साल पहले एक कॉल गया था। कॉन्टेक का नाम था Babe❤️। अभी तक शायद आप समझ हीं गए होंगे में किसकी बात कर रहा हूं। दो साल होगए हमको मिले बिछड़े। पांच साल का रिश्ता इस कदर टूटेगा इसकी भनक तक नहीं थी मुझे।
स्कूल का पहला प्यार और फिर कॉलेज में टकरार भुलाने से भी नहीं भूले जाते। तकलीफ़ वही थी और कुछ नहीं।
डर जरूर था कि कहीं उसका नम्बर ना बदल गया हो, उसके साथ एक ऐसा भी हिचकिचाहट थी दिल में जिसे शायद सिर्फ में हीं समझ सकता था। लेकिन जब हिम्मत की है तो उस काम को अंजाम देने का भी जूनून था।
बहुत सोच समझ कर नंबर डॉयल किया। वोही कॉलर टोन जिससे शायद कभी मुझे राहत मिलती थी और आज भी मिली। डर कुछ हद तक कम होगया और कुछ समय तक रिंग होने के बाद दूसरे तरफ से जवाब आया।
‘Hello!’
यह सुनते हीं मेरे हाथ सुन होगये, सांसे तेज़ होगई और पसीना आने लगा।
मैंने भी जवाब दिया, ‘Hello! पहचाना मुझे?’
नहीं! कौन बोल रहे हैं आप?
‘सुलु’ में हूं तुम्हारा ‘राज’।
बोल तो दिया लेकिन सोच में था की क्या उसे इस तरह सुलू बुलाना सही था? नहीं मुझे उसे उसके पूरे नाम सुलग्ना से हीं बुलाना चाहिए था।
“यह wrong nunber है।” बोलके उसने फोन काट दिया।
तकलीफ बहुत हुई, दिल को एक ठेस पहुंची। लेकिन जिस गुनाह का गुनहगार खुद में हूं उस पर कार्रवाई करने का हक भला किसको है।
बहुत हीं नम और दबी हुई आवाज़ से मैने कहदिया “I am Sorry सुलू।”
लेकिन अब उसका क्या हीं फायदा रहा? सब कुछ खतम होगया है। खुद अपनी जिंदगी की खुशी को मैने अपने हाथों से मिटाया है।
आज भी मुझे याद है वो आखरी पल जिसमे हम एक दूसरे के हाथ पकड़े हुए पार्क में चल रहे थे और वही आखरी होकर रह गया।




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